Thursday, September 15, 2016

""सुनो जाना ""


सुनो जाना ,
ये दिल तुमसे इक बात कहता है,
जो डर तुमको है ,वही डर मेरे सीने में रहता है ,

तुम जात-पात और धर्म की बातें इश्क में करती हो ,
मगर जो दिल में है उसे कहने से डरती हो |

मोहब्बत का कोई जात-पात कोई खुदा नही होता ,
मोहब्बत एहसास है ,और इससे कोई जुदा नही होता ,

मैं भी मोहब्बत करता हूँ ,मगर माँ-बाप को रुसवा नही करता,
माँ-बाप क्या कहेंगे ये सोचता हूँ , पर जमाने से नही डरता ,

माँ-बाप खुश होते हैं खुश जब हम होते हैं ,
आँखे नम होती हैं उनकी , जब हमे कोई गम होते हैं ,

सुनो माँ-बाप से कुछ भी छिपाना नही चाहिए ,
दिल की बातें उनको बता देना चाहिए ,

मगर एक वक्त होता है, हर इक बात कहने का ,
एक वक्त होता है ,समझाने और समझने का ,

आने वाले वक्त को सोच क्र परेशान क्यों हो ?
हंसती हुयी जिन्दगी ,बेजान क्यों हों ?

सुनो मेरी मोहब्बत का तुम एहसास रखना ,
मैं चाहूँगा उम्र भर तुम्हें ,ये विश्वास रखना |

दूरियों से मोहब्बत ,कभी कम नही होती ,
बादल दूर है तो क्या ,जमीं नम नही होती ,

अगर तुम्हें अपनी मोहब्बत पे, जरा सा भी यकीं है ,
विरह की वेदना में भी तडपती ये जमीं है ,

सुनो तुम मेरी मोहब्बत पे ऐतबार करना ,
मेरी तरह ना ,और किसी से प्यार करना,

रुला लेना मुझे .पर देखो! खुद से दूर मत करना ,
मैं जिन्दा लाश बन जाऊंगा ,मुझे मजबूर मत करना ,

बहुत मुश्किल से मैंने ,रो कर हसना सीखा है ,
तुम मिली तो जिन्दगी को जीना सीखा है ,

मैं उमर भर युहीं तुमसे प्यार करूंगा ,
.जब तक साँस होगी ,तेरा इंतजार करूंगा ,

न कोइ शिकवा ना कोई तुमसे शिकायत होगी ,
बस तेरी मोहब्बत की इनायत होगी ,

मेरी मोहब्बत का किसी दिन खुदा को भी एहसास होगा ,
तुम्हे लौटा देगा मुझे , उस दिन तू मेरे पास होगा .

अपनी मोहब्बत की इक छोटी सी दास्ताँ लिखुगा ,
खुद को बेचैन ,और तुझको परेशां लिखुगा ,

और जैसे आसमां से मिलती है जमी ,क्षितिज पे ,
वैसे ही मिलेंगे हम भी तुझसे ,न जाने कहाँ कहीं पे || 
                            (मयंक आर्यन)

Wednesday, September 14, 2016

'''तुम्हें डर हैं ना ...'''

तुम्हें डर हैं ना ...
कि अगर तुम मेरी हो गयी तो ,
बाकी रिश्ते छूट जायेंगे ,
माँ-बाप के जो ख्वाब है ,
सब टूट जायेंगे |

तुम्हें डर हैं ना.....
जिन्होंने पाला है तुमको ,
उनपे क्या बीतेगी ?
माँ की आँखे तुम्हे दूर
जाता देखकर ,रो देगी|

तुम्हें डर है ना..
कि अगर तुम मुझे अपना कह लोगी,
तो जमाना क्या कहेगा ?
मुझे बांहों में भर लोगी ,
तो जमाना क्या कहेगा ?

तुम्हें डर है ना...
कि अगर मैं सामने आ जाऊं ,
तो खुद को ,रोक न पाओगी ,
जमाना भूलकर ,
बांहों में मेरी खो जाओगी|

तुम्हें डर है  ना ....
तुम्हें डर है ना ....
(मयंक आर्यन )

Monday, September 12, 2016


""आ ले चलूँ तुझे , सितारों में वो सनम""

इक होड़  लगी  है, किनारों  में  वो  सनम ,
मौसम  भी बदलते हैं , बहरों के वो सनम |
ये गुलशन ,ये घटा , सब नज़ारे पुराने हैं ,
आ ले चलूँ तुझे , सितारों में वो सनम ||
                                          (मयंक आर्यन )

Friday, September 2, 2016

""""शायरी """"

मोहब्बत के अपने ,कुछ रिवाज तो दो ,
होठों से न सही आँखों से आगाज तो दो |
यकीन नही है क्या ? तुम्हें मेरी मोहब्बत पे ,
 मैं दौड़ा चला आऊंगा ,दिल एक आवाज तो दो || 

नजरों में उसके इश्क़ का आगाज भी था ,
वो रूठा था मुझसे ,नाराज भी था |
सफ़र में कितना दूर निकल गया है वो ,
सुनाई नही देता उसे ,मैंने दिया आवाज भी था ||




मैं नहीं हूँ 

वो नींदों में है ,हमारे मगर ,
उनकी रातों में मैं नहीं हूँ |
वो लफ्जों में है हमारे मगर .
उनकी बातों में मैं नही हूँ |

वो गीतों में है हमारे मगर ,
उनके गानों में मैं नही हूँ ,
वो कहानी मैं है हमारे मगर ,
उनके फ़सानो में मैं नही हूँ||

वो तन्हाईयों में हैं हमारे मगर ,
उनकी महफ़िल में मैं नहीं हूँ ,
वो धडकनों में हैं हमारे मगर ,
उनके दिल में मैं नही हूँ ||

वो झरनों में हैं हमारे मगर ,
उनकी रवानी में मैं नही हूँ ,
वो फ़सानों में हैं हमारे मगर,
उनके कहानी में मैं नहीं हूँ||

वो यादों में हैं हमारे मगर,
उनके ख़यालों में मैं नहीं हूँ ,
वो जवाबों में हैं हमारे मगर ,
उनके सवालों में मैं नही हूँ ||

वो नदियों में हिं हमारे मगर ,
उनके किनारों में मैं नहीं हूँ,
वो चाँद है हमारा मगर ,
उनके सितारों में मैं नहीं हूँ ||

वो सावन में हैं हमारे मगर ,
उनके झूलों में मैं नही हूँ ,
वो फूलों में है हमारे मगर ,
उनके शूलों में मैं नहं हूँ||

वो सादगी में हैं हमारे मगर,
उनकी अदाओं में मैं नही हूँ ,
वो सजदे में हैं हमारे मगर ,
उनकी दुआओं में मैं नहीं हूँ ||
      (मयंक आर्यन)


रफ़्ता -रफ़्ता 

रफ़्ता-रफ़्ता जल रहा है दिल ,
ये आग कैसा है,
बिखरी पड़ी हैं कोंपलें,
ये गुलाब कैसा है ,
बार-बार टूट जाता है बिखरकर ,
आखिर 
ये ख़्वाबकैसा है ,
सितारे बेवफ़ा हो गये क्या ?
जरा पूछो तो ,
माहताब कैसा है ,
ये नूर जो बार-बार छेड़ रहा है मुझको ,
जरा पता तो करो ,
 ये आफ़ताब कैसा है,
जरा बेहोश क्या हुए ,सब खलने लगे मुझसे ,
खुद ही पिलाकर पूछते है , सितमगर ,
ये शराब कैसा है||

(मयंक आर्यन)



रफ़्ता -रफ़्ता 

रफ़्ता-रफ़्ता जल रहा है दिल ,
ये आग कैसा है,
बिखरी पड़ी हैं कोंपलें,
ये गुलाब कैसा है ,
बार-बार टूट जाता है बिखरकर ,
आखिर 
ये ख़्वाबकैसा है ,
सितारे बेवफ़ा हो गये क्या ?
जरा पूछो तो ,
माहताब कैसा है ,
ये नूर जो बार-बार छेड़ रहा है मुझको ,
जरा पता तो करो ,
 ये आफ़ताब कैसा है,
जरा बेहोश क्या हुए ,सब खलने लगे मुझसे ,
खुद ही पिलाकर पूछते है , सितमगर ,
ये शराब कैसा है||

(मयंक आर्यन)

Friday, August 26, 2016


""नजरें  छुपा रहे हो ....""

नजरें  छुपा रहे हो ,
दिल  में कोई राज है क्या ?
हाल-ए-दिल नही कहोगे ,ये भी कोई बात है क्या ?||

चश्म-ए-नम हैं ,
आहत सी लगती है, 
इन आँखों से हुई ,बरसात है क्या ?||

सुनो! ख्वाबों को कहो, 
घर लौट जाये अपने ,
जो तेर बगैर गुजरे, वो भी कोई रात है क्या ?||

उन यादों को तबज्जो,
ये दिल नही देता,
जिनमे तू न हो, वो भी कोई याद है क्या ?||

जब भी लफ़्ज निकले दिल से,
तेरा नाम हो,
जिसमें जिक्र न हो तेरा वो भी कोई जज्बात है क्या ?||

अगर खुदा दे मुझे कुछ,
तो सिर्फ तुझे दे,
जिसमे तू न मिले वो भी कोई सौगात है क्या ?||

                                 (मयंक आर्यन )














Thursday, August 25, 2016

my shayri: ""शायरी""मेरे ख़्वाब में आ जाना कोई बहाना करके ,कभ...

my shayri:
""शायरी""मेरे ख़्वाब में आ जाना कोई बहाना करके ,कभ...
: ""शायरी"" मेरे ख़्वाब में आ जाना कोई बहाना करके , कभी छोड़ कर  न जाना , दिल में घर ठिकाना करके || करती है बेज़ा...

ज़माने बदल गये

माह बदले ,साल बदले और  ज़माने बदल गये ,
कल तलक हमने सूने थे ,वो फ़साने बदल गये ||
अपने थे जो ,सब खो गये ,अब जिन्दगी भाती नही ,
राह भी हैं खो गये , मंजिल नज़र अआती नहीं ||

गर कभी हो सामना ,उस राह से ,तो पूछना ऐ! शोख़ दिल ,
क्यों ? घर बदले ,मकां बदले और ठिकाने बदल गये ||१||


हर तरफ इंसान है ,पर कहीं इंसानियत दिखती नहीं ,
बेसहारे को दे सहारा , ऐसी शख्सियत दिखती नहीं ||
हर तरफ कोहराम है , इंसान हीं इंसान को है लूटते ,
स्वार्थ में होक विवश , बेटे माँ-बाप को न पूछते ||

तू हीं बता अब ऐ ! खुदा ,कैसे जिया जाये यहाँ ,
क्यों ? लोग बदले ,रिश्ते बदले  और अपने बदल गये ||२||


जिस तरफ़ देखा उधर ,जिंदगी घुटती दिखी ,
वक्त के इस चाकरी में , ख्वाहिशें पिसती दिखी ||
आज के इस दौर में ,इंसान बिक जाता यहाँ ,
क्या भला है ,क्या बूरा है , कौन समझाता यहाँ ||

सब जानते हैं गलत क्या है ? पर सही सोचता कोई नहीं ,
क्यों ? सोच बदले ,ख्वाब बदले  और सपने बदल गये ||३||


जिसके हाथों में है सत्ता , अब वहीँ भगवान है ,
कौड़ियों  की  भाव में , बिक रहा इंसान है ||
हर तरफ़ दुःख-दर्द  है , असत्यता का वास है ,
सत्य के भी नाम से , अब टूटता विश्वास है ||

वक्त का इक दौर था , जब प्रेम सरित का वास था ,
क्यों ? नदी बदली , रेत बदले  और किनारे बदल गये ||४||


हे ! मनुज अब जाग जाओ ,अपनी शक्ति कको जगाओ ,
अपनी मनोवृत्ति को बदलो , हर तरफ बदलाव लाओ ||
बुराइयाँ मिट जाएँगी , भ्रष्टता का लोप होगा ,
अच्छाईयां  चहुँ दिशि होंगी ,प्रेम का आलोक होगा ||
फिर अश्रु  भर आँख में ,और ह्रदय पे हाथ रख ,बुराईयाँ चिल्लएंगी ,
क्यों ? वक्त बदला ,लोग बदले और ज़माने बदल गये ||५||
                                 (मयंक आर्यन)







''''''''''शायरी """""

तब्दीलियत चाहता हूँ , पर  होती नहीं मुझमे ,,
नींदें जगती है ,पूरी रात ,सोती नहीं मुझमे ,
उसके चाहत की तड़प ,कुछ इस तरह से है ,,
सिसकती है सारी रात ,रोती नहीं मुझमें ||
                               (मयंक आर्यन)

Saturday, August 20, 2016


""शायरी""

मेरे ख़्वाब में आ जाना कोई बहाना करके ,
कभी छोड़ कर  न जाना , दिल में घर ठिकाना करके ||

करती है बेज़ार  मुझको , अदाएं तेरी ,
बड़ी नखरे दिखाती हो , मुझको दीवाना करके  ||

उस शख्स की वफ़ा पे क्या यकीन करू ,
जिसने छोड़ा है तीर ,मेरी तरफ निशाना करके ||

मजबूर है हर धनकोष ,पैसे के लिए ,
माल्या जबसे गया है ,बैंको को दिवाला करके||
                                 (मयंक आर्यन)



सजा दे मुझको 

मेरे हमदम तेरी  सांसो में ,बसा ले मुझको ,
हूँ गुनाहगार जो तेरा , तो सजा दे मुझको ||

गर तुम्हें शक है, मेरी मोहब्बत पे तो सूनो !  जाना ,
ले ख़ंजर सिने में ,चुभा दे मुझको ||


जो बुझ गये हैं ,चिराग़ घर के तेरे ,
ले माचिस , इस बार जला दे मुझको ||


ऐ !आसमाँ  गर थक गया है तू बारिशों से ,
ले जख्म ,हाथों में मेरा और रुला दे मुझको || 

Wednesday, July 6, 2016

"""""""""""""""ज़माने बदल गये"""""""""""""""""""""

माह बदले ,साल बदले और ज़माने बदल गये,कल तलक जो हमने सूने थे, वो फ़साने बदले गये,गर कभी हो सामना,उस राह से ,तो पूछना ऐ!शोख़ दिल ,क्यों घर बदले, मकां बदले, और ठिकाने बदल गये||हर तरफ इन्सान है, पर कहीं इंसानियत दिखती नहीं,बेसहारे को जो दे सहारा, अब ऐसी शख्सियत दिखती नहीं,हर तरफ़ कोहराम है,इंसान ही इंसान को अब लुटते,स्वार्थ में अब हो विवश, अब बेटे माँ-बाप को ना पूछते,तु हीं बता अब ऐ! खुदा कैसे जिया जाये यहाँ.क्यों लोग बदले, रिश्ते बदले और अपने बदल गये||''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''"""""""""""(मयंक आर्यन)

Sunday, June 19, 2016

मुझे भूलने में ज़माने लगेगें
मुझे भूलने  में तुम्हे जमाने लगेंगे ,
कभी दिल से हमको भुलाकर तो देखो| ,,
तुम्हारी निगाहों में मैं ही बसा हूँ ,
कभी खुद से नज़रें मिलाकर तो देखो||
खफा होके ,क्यों इतना खामोश हो तुम,
की हमने तो बस मोहब्बत ही की है,
मिले दर्द-ओ-गम हमको राह-ए-वफ़ा में,
ख़ुशी और गम का ही नाम ,जिंदगी है |

मैं ऐसा रंग हूँ जो  उतरूं कभी ना ,
तेरे दामन से,.........................
तुम्हे ज़िन्दगी अपनी महफ़िल लगेगी ,
कभी साथ पल दो , बिताकर तो देखो || 

                        (मयंक आर्यन)

Tuesday, December 22, 2015

* mera charagh hawa ke khilaf jalta hai *
mera charagh hawa ke khilaf jalta hai
isi liye to zamaaney ko aaj khalta hai
 
jo tum ne aag lagayi thi tum to bhool gaye
hamarey dil se abhi tak dhuaan nikalta hai
 
usi ko khalney lagi roshni mere ghar ki
mere charagh se jis ka charagh jalta hai
 
sambhal sambhal ke chadho sediyan mohabbat ki
yahan se gir ke kahan aadmi sambhalta hai
 
zamana yun to bahut khush hai meri shauhrat se
kuchch aisey log bhe hein jin ka dum  nikalta hai
 
ghuroor tera munasib nahi taraqqi par
ki shaam aatey he suraj zarur dhalta hai..

by..hasim firojabaadi

Friday, February 27, 2015

my shayri

my shayri

"तेरी यादों ने हमें जिन्दा रखा है ,
वरना मर तो हम उसी दिन गये थे,
जिस रोज तुमने कहा था .....
तुमसे मोहब्बत तो बस मजाक के लिए
किया था ........................................."

Tuesday, February 24, 2015

"माँ "
"जब भी रूठता हूँ खुद से ,वो मुझे मनाती है ,
वो माँ ही है जी मुझे हमेशा समझाती है ,
कैसे चलती है दुनिया ,वो मुझे बताती है ,
वो माँ है जो मुझे सबसे ज्यादा चाहती है |"

"तन्हाईयों में माँ अक्सर, माँ ही याद आती है ,
 होता हूँ जो तुझसे दूर माँ ,मुझे तेरी याद आती है ,
सोचता हूँ अक्सर ,तुम इतनी अनोखी क्यों हो ,
तुम्हे याद करके माँ ,मेरी पलके भींग जाती है |"\
  
"तेरे पास रहना चाहता हूँ मै माँ ,
फिर तेरे हाथो से खाना चाहता हूँ मैं माँ ,
मई तेरा ही अंश हूँ ,ये तस्वीर नजरे दिखाती है ,
ऐ ! माँ सुनो ना ,, तुम्हारी याद हमेशा आती है .."



"विहग गण पूछते हमसे बताओ बात कैसी है.
बहुत मचले  हो तुम दिन को, सहज अब रात कैसी है ,
निखर है चांदनी फिर भी , हो मायूस इतना क्यों?
लिए परियों सी सुन्दरता तुम्हारी चाँद कैसी है ...."