Thursday, August 25, 2016


''''''''''शायरी """""

तब्दीलियत चाहता हूँ , पर  होती नहीं मुझमे ,,
नींदें जगती है ,पूरी रात ,सोती नहीं मुझमे ,
उसके चाहत की तड़प ,कुछ इस तरह से है ,,
सिसकती है सारी रात ,रोती नहीं मुझमें ||
                               (मयंक आर्यन)

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