''''''''''शायरी """""
तब्दीलियत चाहता हूँ , पर होती नहीं मुझमे ,,
नींदें जगती है ,पूरी रात ,सोती नहीं मुझमे ,
उसके चाहत की तड़प ,कुछ इस तरह से है ,,
सिसकती है सारी रात ,रोती नहीं मुझमें ||
(मयंक आर्यन)
नींदें जगती है ,पूरी रात ,सोती नहीं मुझमे ,
उसके चाहत की तड़प ,कुछ इस तरह से है ,,
सिसकती है सारी रात ,रोती नहीं मुझमें ||
(मयंक आर्यन)
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