"कांटे मिले जिन्दगी से हमने , मगर हमने गुलाब लिखा ,
गम की डायरी को हमने .किताब लिखा |
रो पड़ी कलम भी दास्ताँ -ए -मोहब्बत लिखते लिखते ,
पिरो के दर्द लफ्जों में मोहब्बत बेहिसाब लिखा ||"
"प्रेम की सूक्तियां हम तो पढ़ते रहे ,
ख़्वाब तेरे ख्यालों में गढ़ते रहे |
यूँ तुम्हें देखकर थम गयी ये नजर ,
दिल ने कुछ न कहा ,तेरी सुनते रहे ||"
(मयंक आर्यन)
(मयंक आर्यन)
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