Monday, December 29, 2014

"साफिर हूँ प्रेम का मेरी मंजिल नहीं ,
मेरे दिल का पता मुझको हासिल नहीं |
प्रेम में हो विवश तुझको ढूंढता हूँ मैं ,
तुझको पाया मगर ,तू मुझको हासिल नहीं ||"


"इतना ही बता दो जान-ए -वफ़ा  ,
मेरा दिल क्या तुहारे काबिल है ,
कह भी रही है नर्म हवाएं ,
प्यार भी इनमें शामिल है |
डूब रही है कश्ती मेरी ,
सागर की उलट धाराओं में ,
कह दो मेरी पतवार भी तुम हो ,
ओर तुम ही मेरी साहिल हो||"
                  (मयंक आर्यन)

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