Thursday, January 5, 2017

अपनी ये मुक्तक ,एक आशा और अनुरोध के साथ वर्तमान सदी के पुत्रों को समर्पित करता हूँ जो अपने माँ-बाप को उनके वृद्धा अवस्था में उन्हें छोड़ देते हैं .. आशा है वो अपने मां-बाप की भावनाओं को समझेंगे ,और अपनी गलतियों को सुधारने का प्रयत्न करेंगे ..धन्यवाद ...

हृदय की वेदनाओं को ,हृदय में हीं समोती है ,

तुम्हारी याद आने पर ,खिलौनों को संजोती है ,
अवस्था ढल गयी उसकी, तो ठुकरा दिया तुमने ,
जो कल तुमको हसाती थी,वही मां आज रोती है |
        (मयंक आर्यन)

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